जापानी चिप निर्माता कंपनी रेनेसास और भारत की टाटा मोटर्स ने सेमीकंडक्टर समाधान डिजाइन करने, विकसित करने और बनाने के लिए एक रणनीतिक साझेदारी की है। दोनों कंपनियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब सेमीकंडक्टर चिप्स की लगातार वैश्विक कमी के कारण ऑटोमोटिव और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग प्रभावित हो रहे हैं, जिससे उत्पादन में कटौती करनी पड़ रही है, जबकि ताइवान जैसे कुछ स्रोतों पर वैश्विक निर्भरता उजागर हो रही है।
कंपनियों ने एक बयान में कहा कि रेनेसास भारत की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनी टाटा मोटर्स के साथ मिलकर “अगली पीढ़ी के ऑटोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक्स” के विकास पर काम करेगी, ताकि इलेक्ट्रिक और कनेक्टेड वाहनों के विकास में तेजी लाई जा सके।
टाटा की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन ने कहा, “इस सहयोग से भारत के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर भी इन क्षेत्रों में हमारी उपस्थिति बढ़ेगी।”
दोनों कम्पनियों द्वारा सहयोग के क्षेत्रों में उभरती हुई ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकियों पर गैर-अनन्य साझेदारी शामिल है, जैसे कि उन्नत ड्राइवर-सहायता प्रणालियां (ADAS) और साथ ही 5G सहित वायरलेस नेटवर्क समाधान।
यहां रेनेसास टाटा समूह की कंपनी तेजस नेटवर्क्स के साथ मिलकर काम करेगी, ताकि शुरुआत में भारत और अंततः वैश्विक बाजारों के लिए उत्पाद बनाए जा सकें।
भारत उन देशों में शामिल है जो आपूर्ति जोखिम को न्यूनतम करने के प्रयास में सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले बनाने वाली फैक्ट्रियों के घरेलू निर्माण को सब्सिडी देने की होड़ में हैं।
10 बिलियन डॉलर (लगभग 78962 करोड़ रुपये) के प्रोत्साहन की इसकी योजना ने घरेलू समूह वेदांता और ताइवान के फॉक्सकॉन और सिंगापुर के आईजीएसएस वेंचर्स के बीच संयुक्त उद्यम जैसी फर्मों से आवेदन आकर्षित किए हैं।
तेल से लेकर धातु क्षेत्र की दिग्गज कंपनी वेदांता ने चिप और डिस्प्ले विनिर्माण के लिए दो इकाइयों के लिए 20 अरब डॉलर (लगभग 1.6 लाख करोड़ रुपये) का निवेश करने की योजना बनाई है, जबकि आभूषण निर्माता राजेश एक्सपोर्ट्स एक इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले संयंत्र में 3 अरब डॉलर (लगभग 23688 करोड़ रुपये) का निवेश करेगी।
भारत को उम्मीद है कि घरेलू चिप बाजार 2020 में 15 बिलियन डॉलर (लगभग 1.2 लाख करोड़ रुपये) से बढ़कर 2026 तक 63 बिलियन डॉलर (लगभग 5 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच जाएगा।
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