इंदौर:
डब्ल्यूएफआई के अध्यक्ष संजय सिंह ने सोमवार को कहा कि भारत में 2028 ओलंपिक खेलों में महिला कुश्ती में चार से पांच पदक जीतने की क्षमता है, लेकिन ऐसा होने के लिए “कुछ संस्थाओं” को राष्ट्रीय महासंघ के दैनिक कामकाज में हस्तक्षेप करना बंद करना होगा। भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) को खेल मंत्रालय ने निलंबित कर दिया है, जबकि विश्व नियामक संस्था यूडब्ल्यूडब्ल्यू ने फरवरी में अपने चुनाव कराने के बाद अपना निलंबन हटा लिया था। मंत्रालय ने डब्ल्यूएफआई को 24 दिसंबर को निलंबित कर दिया था, उसके तीन दिन बाद चुनाव हुए थे, जिसमें संजय सिंह नए अध्यक्ष चुने गए थे।
मंत्रालय की यह कार्रवाई डब्ल्यूएफआई द्वारा चुनाव के कुछ ही घंटों बाद अंडर-15 और अंडर-20 राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की मेजबानी की घोषणा के बाद आई है।
मंत्रालय ने कहा कि यह घोषणा नियमों के विरुद्ध है क्योंकि खिलाड़ियों को तैयारी करने के लिए 15 दिन का नोटिस देना आवश्यक है।
डब्ल्यूएफआई ने कहा था कि यदि 15 दिन इंतजार किया जाता तो युवा पहलवानों को एक वर्ष का नुकसान होता, क्योंकि तब तक 2023 सत्र समाप्त हो चुका होगा।
मंत्रालय के कहने पर आईओए ने महासंघ को चलाने के लिए एक तदर्थ पैनल का गठन किया था, लेकिन हाल ही में इस पैनल को भंग कर दिया गया। हालांकि, मंत्रालय ने अभी तक इसका निलंबन नहीं हटाया है। संजय सिंह ने पीटीआई से कहा, “अगर डब्ल्यूएफआई को स्वतंत्र रूप से अपना काम करने दिया जाए और कुछ संस्थाएं हमारे कामकाज में हस्तक्षेप करना बंद कर दें, तो हम अगले ओलंपिक में महिला कुश्ती में देश को चार से पांच पदक दिला सकते हैं।”
डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष की यह टिप्पणी भारत की अंडर-17 महिला टीम द्वारा अम्मान में शानदार प्रदर्शन के दम पर विश्व खिताब जीतने के दो दिन बाद आई है, जहां पांच भारतीय पहलवान एक रजत और दो कांस्य पदक जीतने के अलावा विश्व चैंपियन भी बनीं।
संजय सिंह ने विनेश फोगाट से अपने संन्यास के फैसले पर पुनर्विचार करने का भी आग्रह किया।
पेरिस ओलंपिक में पदक से चूकने के बाद विनेश ने खेल से संन्यास की घोषणा कर दी थी। महिलाओं के 50 किग्रा फाइनल से पहले 100 ग्राम अधिक वजन होने के कारण उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया था।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर विनेश फोगाट को शुद्ध कुश्ती ही खेलनी है तो उन्हें अपने संन्यास के फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए क्योंकि नई पीढ़ी की महिला पहलवानों को उनसे प्रेरणा मिलेगी और वे आगे बढ़ेंगी।
उन्होंने कहा, ‘‘जिस तरह से वह आजकल राजनीतिक मंच साझा कर रही हैं, अगर उन्हें भविष्य में राजनीति करनी है तो उन्हें कुश्ती में राजनीति नहीं करनी चाहिए।’’
फोगट के राजनीति में उतरने की अटकलों पर सिंह ने टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि यह 30 वर्षीय पहलवान का निजी मामला है। उन्होंने कहा कि अगर फोगट प्रतिस्पर्धी कुश्ती में लौटती हैं तो वह उनका पूरा समर्थन करेंगे।
सिंह ने यह भी कहा कि 2023 में देश के पहलवानों के आंदोलन ने डब्ल्यूएफआई को “बहुत बड़ा सबक” दिया है।
यह आंदोलन तत्कालीन डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ कथित यौन उत्पीड़न मामले में शुरू किया गया था।
उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद थी कि पेरिस ओलंपिक में भारतीय पहलवान छह पदक जीतेंगे, लेकिन राष्ट्रविरोधी ताकतों की साजिश के तहत कुश्ती गतिविधियों को 18 महीने तक रोक दिया गया। इस आंदोलन के कारण देश को ओलंपिक में केवल एक पदक मिल सका।”
उन्होंने कहा, “मैं कुश्ती और राजनीति को अलग रखना चाहता हूं। इसलिए मैं इस आंदोलन को शुरू करने वाले किसी व्यक्ति का नाम नहीं लेना चाहता, लेकिन कुश्ती में राजनीति के प्रवेश के कारण ही पेरिस ओलंपिक में कुश्ती का यह हश्र हुआ है।”
उन्होंने यह भी बताया कि डब्ल्यूएफआई मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में कुश्ती अकादमी खोलने पर विचार कर रहा है।
राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव राज्य कुश्ती संघ के अध्यक्ष हैं।
उन्होंने कहा, “उज्जैन में कुश्ती अकादमी खोलने की योजना के संबंध में मुख्यमंत्री के साथ प्रारंभिक चर्चा पहले ही चल चुकी है।”
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