नई दिल्ली: एक युवा चिकित्सक के साथ बलात्कार और हत्या के विरोध में सोमवार को कई राज्यों के सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों ने “अनिश्चित काल के लिए” वैकल्पिक सेवाएं बंद कर दीं।
पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित एक सरकारी अस्पताल में शुक्रवार को 31 वर्षीय महिला का क्षत-विक्षत शव मिला था, जिस पर कई चोटों के निशान थे। वह वहां रेजिडेंट डॉक्टर थी।
बाद में किए गए शव परीक्षण में यौन उत्पीड़न और हत्या की पुष्टि हुई।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने एक व्यक्ति को हिरासत में लिया है जो पीड़ित के अस्पताल में काम करता था और लोगों को व्यस्त कतारों से निकलने में मदद करता था।
न्याय और बेहतर कार्यस्थल सुरक्षा की मांग को लेकर डॉक्टरों का प्रदर्शन, जो पहले कोलकाता से शुरू हुआ था, अब देश के अन्य भागों में भी फैल गया है।
भारत में महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा एक व्यापक समस्या है – 1.4 अरब की आबादी वाले देश में 2022 में औसतन प्रतिदिन लगभग 90 बलात्कार की घटनाएं दर्ज की गईं।
लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें मरीजों के गुस्साए परिजनों से कार्यस्थल पर हिंसा का अतिरिक्त खतरा भी रहता है, खासकर बुरी खबर देने के बाद।
फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के सर्वेश पांडे ने कहा, “अस्पतालों में कड़े सुरक्षा उपाय होने चाहिए और सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने चाहिए।”
पांडे ने कहा कि प्रदर्शनकारी डॉक्टरों की मांगों में स्वास्थ्य कर्मियों को कार्यस्थल पर हिंसा से बचाने के लिए एक विशेष कानून बनाना भी शामिल है।
पांडे ने कहा, “हर दिन ऐसी घटनाएं होती हैं जिनमें डॉक्टरों पर हमला किया जाता है।”
भारतीय चिकित्सा संघ द्वारा किये गए एक सर्वेक्षण में पाया गया कि भारत में 75 प्रतिशत डॉक्टरों को किसी न किसी रूप में हिंसा का सामना करना पड़ा है।
