विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को कहा कि केंद्र सरकार के 12 मंत्रालय वर्तमान में ड्रोन सेवाओं की स्वदेशी मांग को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं और आने वाले वर्षों में भारत को लगभग एक लाख ड्रोन पायलटों की आवश्यकता होगी।
नीति आयोग के एक कार्यक्रम में सिंधिया ने कहा, “हम ड्रोन क्षेत्र को तीन पहियों पर आगे ले जा रहे हैं। पहला पहिया नीति का है। आपने देखा है कि हम कितनी तेजी से नीति को लागू कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि दूसरा चरण प्रोत्साहन पैदा करना है।
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री के नेतृत्व में लागू की गई पीएलआई (उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन) योजना से ड्रोन क्षेत्र में विनिर्माण और सेवाओं को नए सिरे से बढ़ावा मिलेगा।”
पीएलआई योजना सितंबर 2021 में मंत्रालय द्वारा 25 अगस्त, 2021 को जारी उदारीकृत ड्रोन नियम, 2021 के अनुवर्ती के रूप में आई।
सिंधिया ने कहा कि तीसरा पहिया स्वदेशी मांग पैदा करना है और केंद्र सरकार के 12 मंत्रालयों ने यह मांग पैदा करने की कोशिश की है।
उन्होंने कहा कि आज ड्रोन पायलट को 12वीं कक्षा पास करके प्रशिक्षित किया जा सकता है, इसके लिए किसी कॉलेज की डिग्री की आवश्यकता नहीं है।
उन्होंने कहा, “2-3 महीने के प्रशिक्षण के बाद यह व्यक्ति ड्रोन पायलट के रूप में अपनी नौकरी पर लग जाता है और उसे लगभग 30,000 रुपये प्रति माह वेतन मिलता है।”
उन्होंने कहा, “आने वाले वर्षों में हमें करीब एक लाख ड्रोन पायलटों की आवश्यकता होगी। इसलिए अवसर बहुत बड़ा है।”
सिंधिया ने पिछले साल 16 सितंबर को कहा था कि भारतीय ड्रोन उद्योग का कुल कारोबार 2026 तक 15,000 करोड़ रुपये तक हो जाएगा।