भारी उद्योग राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर ने मंगलवार को कहा कि सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों के सुरक्षा मानकों को लेकर सतर्क है और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों से निपटने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में मंत्री ने कहा कि विशेषज्ञ समिति का गठन रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) बेंगलुरु और नौसेना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला (एनएसटीएल) विशाखापत्तनम के स्वतंत्र विशेषज्ञों के साथ किया गया है।
विशेषज्ञ समिति को इलेक्ट्रिक वाहनों की सुरक्षा से संबंधित हालिया मुद्दों से निपटने की जिम्मेदारी दी गई है।
गुर्जर ने कहा, “ई.वी. के घटकों का परीक्षण प्रासंगिक मानकों के अनुसार किया जाता है, जैसा कि केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 126 में निर्दिष्ट है, ताकि अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।”
मंत्री ने संसद के निचले सदन को सूचित किया कि तीन विनिर्माण कंपनियों ने सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण इलेक्ट्रिक वाहनों को वापस बुलाया है।
16 अप्रैल को ओकिनावा ने 3215 यूनिट वाहन वापस मंगाए। इसके बाद 21 अप्रैल को प्योर ईवी ने 2,000 यूनिट वाहन वापस मंगाए। कुछ दिनों बाद ओला इलेक्ट्रिक ने घोषणा की कि वह 1,441 यूनिट वापस मंगा रही है।
सोमवार को एथर एनर्जी के सह-संस्थापक और सीईओ तरुण मेहता ने कहा कि इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन मुख्यधारा में आ रहे हैं और आग लगने की घटनाएं निर्माताओं को गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करेंगी, जिससे उद्योग को परिपक्व होने में मदद मिलेगी।
हीरो मोटोकॉर्प समर्थित कंपनी को उम्मीद है कि इस दशक के अंत तक भारत में 30 मिलियन तक इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन बेचे जाएंगे और एथर एनर्जी अगले कुछ वर्षों में क्षमता वृद्धि के लिए “काफी अधिक” निवेश करेगी।
उन्होंने पीटीआई-भाषा से कहा, “मुझे लगता है कि हाल में जो कुछ हुआ है, उससे उद्योग परिपक्व हो गया है। इससे अधिक से अधिक निर्माता गुणवत्ता और विश्वसनीयता पर अधिक ध्यान केंद्रित करेंगे।”
मेहता इस सवाल का जवाब दे रहे थे कि ओला इलेक्ट्रिक, ओकिनावा, प्योरईवी और यहां तक कि एथर के एकमात्र मामले जैसे विभिन्न निर्माताओं के इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों में आग लगने की घटनाओं का भारत में ईवी के विकास पर क्या प्रभाव पड़ेगा।