हरित गतिशीलता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को 'पीएम-ई-बस सेवा' योजना को मंजूरी दे दी, जिसके तहत सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत 169 शहरों को 10,000 इलेक्ट्रिक बसें उपलब्ध कराई जाएंगी।
केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि इस योजना की अनुमानित लागत 57,613 करोड़ रुपये होगी, जिसमें से 20,000 करोड़ रुपये केंद्र सरकार द्वारा प्रदान किए जाएंगे और शेष राशि राज्यों द्वारा वहन की जाएगी।
उन्होंने कहा कि उन शहरों को प्राथमिकता दी जाएगी, जहां व्यवस्थित बस सेवा नहीं है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने कहा कि यह योजना 2037 तक जारी रहेगी।
उन्होंने कहा कि पीपीपी मॉडल के तहत दस हजार ई-बसें चलाई जाएंगी और हरित शहरी गतिशीलता पहल के तहत 181 शहरों में बुनियादी ढांचे को भी उन्नत किया जाएगा।
इस योजना के दो खंड हैं – 169 शहरों में सिटी बस सेवाओं का विस्तार करना तथा 181 शहरों में हरित शहरी गतिशीलता पहल।
मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक हुई और 57,613 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ 'पीएम-ई-बस सेवा' योजना को मंजूरी दी गई।
उन्होंने कहा कि ई-बसें 5 लाख से 40 लाख की आबादी वाले शहरों में उपलब्ध कराई जाएंगी और यह योजना 10 वर्षों तक बस संचालन को समर्थन देगी।
उन्होंने कहा, “योजना के लिए शहरों का चयन एक चुनौती के माध्यम से किया जाएगा। इन शहरों में सार्वजनिक परिवहन में सहायता के लिए गैर-मोटर चालित परिवहन भी उपलब्ध कराया जाएगा।”
ठाकुर ने कहा कि 5 लाख से कम आबादी वाले शहरों में 50 बसें, 5 लाख से 20 लाख की आबादी वाले शहरों में 100 बसें तथा 20 से 40 लाख की आबादी वाले शहरों में 150 बसें उपलब्ध करवाई जाएंगी।
उन्होंने कहा कि जो शहर पुरानी बसों को हटाएंगे, उन्हें और बसें दी जाएंगी। बसों की खरीद, संचालन और रखरखाव पीपीपी मॉडल के तहत किया जाएगा और इस योजना के तहत केंद्रीय सहायता भी दी जाएगी।
उन्होंने कहा, “भारत सरकार द्वारा दिए जाने वाले कुल 20,000 करोड़ रुपए में से 15,930 करोड़ रुपए बसों के लिए, 2,264 करोड़ रुपए बुनियादी ढांचे के विकास और बैक-एंड सुविधाएं प्रदान करने के लिए तथा 1,506 करोड़ रुपए हरित शहरी गतिशीलता के लिए दिए जाएंगे।”
मंत्री ने कहा, ‘‘राज्य इस योजना के तहत लागत का 40 प्रतिशत वहन करेंगे, जबकि केंद्र सरकार राज्यों को 60 प्रतिशत सहायता प्रदान करेगी।’’ ठाकुर ने कहा कि पहाड़ी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और पूर्वोत्तर राज्यों में केंद्र सरकार इस योजना के तहत 90 प्रतिशत सहायता प्रदान करेगी और शेष राशि राज्यों को वहन करनी होगी।
केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि इस योजना के तहत शहर बस सेवाएं चलाने और बस ऑपरेटरों को भुगतान करने के लिए जिम्मेदार होंगे।
इसमें कहा गया है कि केंद्र सरकार प्रस्तावित योजना में निर्दिष्ट सीमा तक सब्सिडी प्रदान करके इन बस परिचालनों का समर्थन करेगी। इसमें उन शहरों को प्राथमिकता दी जाएगी जहां कोई संगठित बस सेवा नहीं है।
केंद्रीय बजट 2021-22 पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शहरी क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए 18,000 करोड़ रुपये की योजना की घोषणा की थी।
बुधवार को जारी बयान में कहा गया, “(बस) योजना ई-मोबिलिटी को बढ़ावा देगी और मीटर के पीछे बिजली के बुनियादी ढांचे के लिए पूर्ण समर्थन प्रदान करेगी। बस प्राथमिकता वाले बुनियादी ढांचे को समर्थन न केवल अत्याधुनिक, ऊर्जा कुशल इलेक्ट्रिक बसों के प्रसार में तेजी लाएगा, बल्कि ई-मोबिलिटी क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देगा और साथ ही इलेक्ट्रिक वाहन के लिए लचीली आपूर्ति श्रृंखला का विकास भी करेगा।”
इसमें कहा गया है कि यह योजना जनगणना-2011 के अनुसार 3 लाख और उससे अधिक आबादी वाले शहरों को कवर करेगी, जिसमें केंद्र शासित प्रदेशों, पूर्वोत्तर क्षेत्र और पहाड़ी राज्यों के सभी राजधानी शहर शामिल होंगे।
ठाकुर ने कहा कि इस योजना से शहरी बस परिचालन में लगभग 10,000 बसों की तैनाती के माध्यम से 45,000 से 55,000 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे।
169 शहरों में सिटी बस सेवाओं का विस्तार तथा 181 शहरों में हरित शहरी गतिशीलता पहल इस योजना के दो खंड हैं।
इसमें कहा गया है, “संबद्ध बुनियादी ढांचे से डिपो बुनियादी ढांचे के विकास/उन्नयन और ई-बसों के लिए मीटर के पीछे बिजली बुनियादी ढांचे (सबस्टेशन आदि) के निर्माण के लिए सहायता मिलेगी।”
दूसरे खंड के अंतर्गत, योजना में बस प्राथमिकता, बुनियादी ढांचे, मल्टी-मॉडल इंटरचेंज सुविधाएं, एनसीएमसी-आधारित स्वचालित किराया संग्रह प्रणाली और चार्जिंग बुनियादी ढांचे जैसी हरित पहलों की परिकल्पना की गई है।
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