नई दिल्ली: केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया सिंह पटेल ने संयुक्त राष्ट्र में एक उच्च स्तरीय कार्यक्रम के दौरान कहा कि अनेक केंद्रित प्रयासों और पहलों के फलस्वरूप, वर्ष 2010 से अब तक नए वार्षिक एचआईवी संक्रमणों की व्यापकता में 44 प्रतिशत की कमी आई है, जो वैश्विक कमी दर 39 प्रतिशत से अधिक है।
अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री ने कहा, “हाल ही में भारत एचआईवी अनुमान 2023 रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2.5 मिलियन से अधिक लोग एचआईवी से पीड़ित हैं। ठोस प्रयासों की बदौलत, वयस्कों में एचआईवी का प्रसार 0.2 प्रतिशत है, और अनुमानित वार्षिक नए एचआईवी संक्रमण लगभग 66,400 हैं। 2010 से नए वार्षिक एचआईवी संक्रमण में 44 प्रतिशत की कमी आई है, जो वैश्विक कमी दर 39 प्रतिशत से बेहतर है।”
उन्होंने कहा, “भारत सभी गर्भवती महिलाओं को व्यापक एचआईवी और सिफलिस परीक्षण की सुविधा प्रदान करता है, जिसमें सालाना 30 मिलियन से अधिक निःशुल्क एचआईवी परीक्षण किए जाते हैं। कुल मिलाकर, 1.7 मिलियन से अधिक लोग सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों के माध्यम से निःशुल्क एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) प्राप्त कर रहे हैं।”
पटेल ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि भारत दुनिया में एंटी-रेट्रोवायरल दवाओं का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है, जो वैश्विक उत्पादन का 70 प्रतिशत से अधिक है। देश जरूरतमंद देशों को सस्ती पहुंच सुनिश्चित करता है। मंत्री ने कहा, “हमें दुनिया भर में गुणवत्तापूर्ण उपचार सुलभ बनाकर एचआईवी/एड्स के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में योगदान देने पर गर्व है।”
एचआईवी रोगियों के सामने आने वाली अन्य जटिलताओं से निपटने के लिए, पटेल ने बताया, “तपेदिक, वायरल हेपेटाइटिस और गैर-संचारी रोगों से निपटने के प्रयासों सहित राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों को एकीकृत करने के लिए भारत का दृष्टिकोण एचआईवी के साथ रहने वाले लोगों के सामने आने वाली सह-रुग्णताओं को दूर करने में मदद कर रहा है।”
संयुक्त राष्ट्र में उच्च स्तरीय कार्यक्रम का विषय था “पुनर्जीवित बहुपक्षवाद: मिलकर एड्स को समाप्त करने के लिए पुनः प्रतिबद्धता” और इसका आयोजन यूएनएड्स, ग्लोबल फंड और पीईपीएफएआर द्वारा किया गया था।
