दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में अगले दो महीनों में 100 इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित हो जाएंगे।
केजरीवाल ने मंगलवार को 11 चार्जिंग स्टेशनों का उद्घाटन किया और कहा कि इन सुविधाओं में बैटरी स्वैपिंग पॉइंट भी शामिल होंगे।
उन्होंने कहा, “पहले बैटरी स्वैपिंग पॉइंट और चार्जिंग स्टेशन अलग-अलग थे, लेकिन अब इन्हें एक साथ जोड़ दिया गया है। इन 11 स्टेशनों पर 73 चार्जिंग पॉइंट हैं। अगले दो महीनों में दिल्ली को 100 चार्जिंग स्टेशन मिल जाएंगे।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि इनमें से अधिकतर चार्जिंग स्टेशन मेट्रो स्टेशनों पर स्थापित किए जा रहे हैं, ताकि लोग अपने वाहनों को चार्जिंग स्टेशनों पर छोड़ सकें, मेट्रो से अपने गंतव्य तक जा सकें और फिर पूरी तरह चार्ज वाहन लेकर घर लौट सकें।
उन्होंने कहा कि चार्जिंग स्टेशन सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत बनाए गए हैं, जिसके लिए दिल्ली सरकार ने 100 भूखंडों की पहचान की है।
उपकरण और जनशक्ति रियायतग्राहियों द्वारा उपलब्ध कराई गई है।
मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर कहा, “आज मैंने दिल्ली में 11 चार्जिंग स्टेशन का उद्घाटन किया। ये एक अनोखे मॉडल पर आधारित हैं। इन स्टेशनों पर वाहन चार्ज होने के बाद उन्हें चलाना बेहद किफायती होगा। आज दिल्ली ने दुनिया को सबसे सस्ता मॉडल दिया है।” उन्होंने कहा कि एक उपयोगकर्ता अपने वाहन को चार्ज करने के बाद प्रति किलोमीटर दोपहिया वाहन के लिए 7 पैसे, तिपहिया वाहन के लिए 8 पैसे और कार के लिए 33 पैसे खर्च करेगा, जो पेट्रोल, डीजल और सीएनजी से अधिक किफायती है।
अगस्त 2020 में शुरू की गई महत्वाकांक्षी दिल्ली इलेक्ट्रिक वाहन नीति का लक्ष्य 2024 तक कुल बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी को 25 प्रतिशत तक बढ़ाना है।
दिल्ली संवाद एवं विकास आयोग के उपाध्यक्ष जैस्मीन शाह को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस के बारे में बोलते हुए केजरीवाल ने कहा, “कैबिनेट ने उन्हें नियुक्त किया है और केवल कैबिनेट ही उनसे सवाल कर सकती है।” सूत्रों ने बताया कि दिल्ली सरकार के योजना विभाग ने सोमवार को शाह को आम आदमी पार्टी (आप) के “आधिकारिक प्रवक्ता” के रूप में काम करके “सार्वजनिक पद का दुरुपयोग” करने के आरोप में कारण बताओ नोटिस जारी किया।
यह कार्रवाई भाजपा नेता और पश्चिमी दिल्ली के सांसद प्रवेश वर्मा की शिकायत के बाद की गई।
आम आदमी पार्टी ने इस नोटिस को “गुजरात में दिल्ली सरकार की बढ़ती लोकप्रियता के कारण उस पर एक और हमला” करार दिया है।